हर रुप में कान्हा सबके मनमीत
कृष्णकन्हैया हम तेरे विनित
तुम देवकीनंदन वसुदेव चित
यशोदामैया छबी मन मोहित
हर रुप में तुम सबके मनमीत
गिरीधर तुम बासुरी के गीत
तुम गोपियोसंग राधा की प्रित
तुम मिरा विरक्त मुक्तचरित
हर रुप में तुम सबके मनमीत
द्रोपदी सखा पांडवों.की जीत
तुम कालिंदी लहरों का संगित
तुम सुर्यप्रभा चाँदणी सुगंधित
हर रुप में तुम सबके मनमीत
तुम जनमन का विश्वचरित
तुम विपदा मे सकल सुघटित वेदसुक्त सदा तुम नवनित
हर रुप में तुम सबके मनमीत
देह मेँ विदेही बने बंधन रहित
तुम करुणा तुम कर्ता विश्वजीत
तुम जीवन गीता अमर सुनीत
हर रुप में तुम सबके मनमीत
सिखे तुझसे हम मुक्तीगीत
हम तेरी कृपा आभिलाषित
सदा दिपस्तंभ बने कृष्णचरित
हर रुप में तुम सबके मनमीत
रचना सौ चित्ररेखा रविंद्रनाथ जाधव रायगड
कृष्णजन्मचा आनंद सोहळा लाभो सदोदित अनंत शुभेच्छा
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