सुसंवाद काल आज उद्या चित्ररेखा र.जाधव: नारी हू मै मुक्ती समर चलूँगी

सुसंवाद काल आज उद्या चित्ररेखा र.जाधव: नारी हू मै मुक्ती समर चलूँगी: *मुक्ती  समर मैं चलूँगी* हमें न्याय  न दिलाया   प्रकृती न भेद  किया बुद्धी शरीर सम दिया   नारी को  हरदम सताया भेद किसीने  न  मिटाया //१//  ह...

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अभिवादन सावित्रीबाई फुले यांना

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