नारी हू मै मुक्ती समर चलूँगी

*मुक्ती  समर मैं चलूँगी*

हमें न्याय  न दिलाया 
 प्रकृती न भेद  किया
बुद्धी शरीर सम दिया 
 नारी को  हरदम सताया
भेद किसीने  न  मिटाया //१//
 हरवक्त  पिडीत किया
पिटा कभी मार   दिया
कभि  गर्भ में  गिराया 
 भेद किसीने न  मिटाया,//२//
 
 दहेज  दहलिज जलाया
हर बार दर्दसे रुलाया
शिक्षा से दुर करवाया
समाज मे निचा दिखाया
ये भेद किस न  मिटाया //३//

नासमज कर टाल दिया
अधिकार से वंचित  कराया
 खोखले परंपरा मे बंधाया
जब चाहा दूरपास बुलाया
ये भेद किस न  मिटाया //४//
खिलोंनो सा खिलवाया
धर्म के नाम नचाया
त्यागमुर्ती  देवी बनाया
कभी कर्तव्य न निभाया
ये भेद किस न  मिटाया //५//
हर बार चुप  कराया
 अग्यान मे पिसाया
 न इन्साफ दिलाया //६//
मगर मैंअब बोलूंगी
मुक्ती समर मे चलूँगी
देवी न दासी बनूंगी
स्वंतत्र नारी हो चमकुँंगी //७//

चित्ररेखा रविंद्रनाथ जाधव पनवेल रायगड महाराष्ट्र 
ईमेल.
ccucrdbbj@gmail.com
9421160695

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